अक्टूबर 2018

इतिहास दिवाकर
आयतन 11, मुद्दा 3
अक्टूबर
01 अक्ट 2018
अटल बिहारी वाजपेयी पुराण भारतीय इतिहास राजनीति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वैज्ञानिक विश्लेषण संस्कृति
अक्टूबर 2018
यह प्रकाशन 'इतिहास दिवाकर' का अक्टूबर 2018 का अंक है, जो एक त्रैमासिक अनुसंधान पत्रिका है। इस अंक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा पर सरसंघचालक मोहन राव भागवत का एक विस्तृत उद्बोधन शामिल है। इसमें भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन, संघ से सम्बन्ध और राष्ट्र चिंतन पर कई लेखों के माध्यम से श्रद्धांजलि दी गई है। साथ ही, 'मनु और मनाली की ऐतिहासिकता' पर एक वैज्ञानिक अवलोकन प्रस्तुत किया गया है और भागवतपुराण कालीन इतिहास का विश्लेषण भी शामिल है।
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मुख्य विशेषताएं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा और 'भविष्य का भारत' विषय पर सरसंघचालक मोहन राव भागवत का विस्तृत उद्बोधन।

पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि, जिसमें उनके जीवन, राजनीतिक यात्रा और संघ के साथ उनके संबंधों का विश्लेषण किया गया है।

मनु और मनाली की ऐतिहासिकता पर एक वैज्ञानिक शोध, जो वैदिक ब्रह्मांड विज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक निष्कर्षों के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास करता है।

भागवत पुराण में वर्णित ऐतिहासिक घटनाओं और कालक्रम का विश्लेषण, जो भारतीय इतिहास के एक प्राचीन दृष्टिकोण को प्रस्तुत करता है।

योगदानकर्ताओं

डश
डॉ. राकेश कुमार शर्मा
सम्पादक (Editor)
डव
डॉ. विवेक शर्मा
सह सम्पादक (Co-Editor)
डम
डॉ. मोहन राव भागवत
लेखक (Author)
डभ
डॉ. भाग चन्द चौहान
लेखक (Author)
भौतिक शास्त्र विभाग, केन्द्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला
डइ
डॉ. इन्द्र सिंह ठाकुर
लेखक (Author)
राजकीय महाविद्यालय संजौली, जिला शिमला
ऋक
ऋषि कुमार
लेखक (Author)
राजनीतिक विज्ञान विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला
डक
डॉ. कृष्ण मोहन पाण्डेय
लेखक (Author)
पच
प्यार चन्द परमार
व्यवस्थापक (Manager) / लेखक (Author)
गांव नेरी, डा. खगल, जिला हमीरपुर (हि.प्र.)

प्रकाशन सारांश

इतिहास दिवाकर - अक्टूबर २०१८

सम्पादकीय: अभ्यास से व्यवहार का मामला

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विश्व का सबसे बड़ा गैर राजनीतिक संगठन है। इसका आधार सांस्कृतिक राष्ट्रवाद है। यह व्यक्ति निर्माण पर जोर देता है। इस विचार की व्यापकता किसी न किसी रूप में सम्पूर्ण विश्व में व्याप्त है। यह किसी को अपना विरोधी नहीं मानता। जो इसे अपना विरोधी मानता है उसे यह खुला निमन्त्रण देता है – “आओ! संघ कार्य पद्धति को देखो। यदि इस में कुछ गलत है तो बताओ। भारत का शाश्वत चिन्तन सर्वे भवन्तु सुखिनः की दिशा में किया जाने वाला प्रयास संघ शाखा पद्धति में सिखाया जाता है। यह अभ्यास से व्यवहार का मामला है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रान्त के प्रचार विभाग ने १७ से १६ सितम्बर, २०१८ को दिल्ली विज्ञान भवन में भविष्य का भारत विषय पर प्रबुद्ध नागरिकों के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसमें सरसंघचालक माननीय मोहन राव भागवत जी ने संघ विचारधारा तथा उससे सम्बन्धित विषयों पर प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए। १८ सितम्बर को दिए गए उनके उद्बोधन का एक भाग इस अंक में प्रकाशित किया जा रहा है। यह उनकी उद्बोधन शैली पर ही है। इसमें कोई फेर-बदल नहीं किया गया है।

भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का देहावसान अपूर्णीय क्षति है। वाजपेयी जी अपने आप में एक संस्था थे। उनका व्यक्तित्व विशाल था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विचारधारा में पालित–पोषित वे प्रथम प्रधानमन्त्री थे जिनकी छवि और व्यक्तित्व सब को जोड़ता था। इतिहास दिवाकर परिवार ऐसी महान विभूति की दिवंगत आत्मा की शान्ति की कामना करता है।

इस वर्ष भारत में बरसात रौद्र रूप में आई। केरल राज्य का आधे से ज्यादा भाग जल मग्न हो गया था। हिमाचल प्रदेश में सितम्बर मास में हिमपात होना तो प्रकृति का प्रकोप ही माना जाएगा। इन प्राकृतिक आपदाओं से जन–धन, पशु व फसलों सहित सब प्रकार से अत्याधिक क्षति हुई। सरकार द्वारा विकास योजनाएं बनाते समय केवल भौतिक सुख पर ही ध्यान न देकर, बल्कि प्रकृति से अत्याधिक छेड़छाड़ के कारण आने वाली परेशानियों पर ध्यान देना भी अधिक महत्त्वपूर्ण है। डॉ. भाग चन्द चौहान द्वारा प्रस्तुत शोध पत्र नये आयामों को खोलने वाला है। आगामी दिनों में त्यौहारों की श्रृंखला– दशहरा, दीपावली, भैयादूज आदि त्यौहारों पर सभी के मंगल की कामना।

उद्बोधन: भारत सांस्कृतिक राष्ट्र है

डॉ. मोहन राव भागवत

मंच पर उपस्थित माननीय संघचालकगण। उपस्थित सभी महानुभावों, माताओं, बहनों। संघ कार्य व्यक्ति निर्माण का कार्य है, व्यक्ति निर्मित होने के बाद समाज में वातावरण बनाते हैं। समाज के आचरण में परिवर्तन लाने का प्रयास करते हैं और ये पूरा स्वावलम्बी पद्धति से और सामूहिकता से चलने वाला काम और मन मर्जी का काम है। इसमें आना-जाना बिना शुल्क है और कोई जबरस्ती का मामला चल भी नहीं सकता क्योंकि जबरदस्ती करने के लिए हाथ में कुछ है नहीं, अपनी दोस्ती ही केवल है। अब जैसे-जैसे कार्य बढ़ता है तो स्वयंसेवकों को शिक्षा मिली है कि संघ केवल एक ही काम करेगा व्यक्ति निर्माण का, लेकिन स्वयंसेवक समाज के हित में जो-जो करना पड़ेगा वो करेगा। शक्ति बढ़ती है तो संघ चलाने के लिए जितने स्वयंसेवक हैं उनको छोड़कर बाकी स्वयंसेवक खाली तो नहीं बैठते। समाज में उनको जो समझ में आता है उसके अनुसार वो किसी न किसी कार्य को हाथ में लेते हैं। कोई और कर रहा है तो अनुशासन में रहकर उसके साथ जुट जाते हैं।

संवीक्षण: मनु और मनाली की ऐतिहासिकता : एक वैज्ञानिक अवलोकन

डॉ. भाग चन्द चौहान

भारतीय काल-गणना और आधुनिक विज्ञान की काल-गणना में आश्चर्यजनक रूप से मेल होना, जिसे प्रो. कार्ल सागन अपनी पुस्तक 'कोरमोंस' में प्रस्तुत करते हैं, भारतीय ऋषियों की अद्भुत प्रज्ञा, मेधा और मानसिक पराकाष्ठा का परिचायक है। मन्त्रद्रष्टा ऋषि समाधिस्थ होकर उस परब्रह्म से दिव्य साक्षात्कार कर वेद-मन्त्रों को रचता है। रुचिकर बात तो यह है कि इन वेद-मन्त्रों के गूढ़ रहस्यों को विभिन्न कालखंडों में अनेकों ऋषियों द्वारा लोक रुचि और क्षमता के अनुसार दर्शनों, पुराणों, स्मृतिओं और अनेकों शास्त्र ग्रन्थों में विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया गया है। चार वेदों में ऋग्वेद आज निर्विवाद सम्पूर्ण विश्व में सबसे प्राचीन उपलब्ध लिखित ग्रन्थ माना जाता है। ब्रह्माण्ड की रचना के बारे में ऋग्वेद में कई सूत्र हैं, जिसमें हिरण्यगर्भ, नासदीय और पुरुष सूक्त के सूत्र सृष्टि की रचना के उस सत्य को व्यक्त करते हैं।

अटल जी की जीवन यात्रा

डॉ. इन्द्र सिंह ठाकुर

अटल जी का जन्म ग्वालियर की शिंदे की बस्ती में कलियुगाब्द ५०२६, विक्रमी संवत् १६८१ (२५ मई, १६२४ ई.) को ब्रह्म मुहूर्त में हुआ था। विद्यालय प्रमाण-पत्र उनका जन्म दो साल बाद १६२६ ई. बताता है। पं. कृष्ण बिहारी के चार पुत्र अवध बिहारी, सदा बिहारी, प्रेम बिहारी, अटल बिहारी तथा तीन पुत्रियां बिमला, कमला और उर्मिला हुई। परिवार भरा-पूरा था। परिवार का विशुद्ध भारतीय वातावरण अटल जी की रग-रग में बचपन से ही रचने-बसने लगा। यही कारण है कि आज भी अटल बिहारी वाजपेयी भारत की जनता के हृदय के सम्राट हैं। उनके प्रति जनमानस में अटूट श्रद्धा का पारावार उफनता रहता है। आज दिवंगत होकर भी उनकी लोकप्रियता का ग्राफ सदैव ही ऊपर बढ़ता आया है। अटल जी आजीवन अविवाहित रहे। जब-जब माता-पिता ने शादी की चर्चा चलाई, तभी साफ इन्कार कर देते थे। उन्होंने अपना जीवन भारत माता की सेवा में अर्पित कर दिया था।

अटल जी का संघ सम्बन्ध एवं राष्ट्र चिन्तन

ऋषि कुमार

अटल बिहारी वाजपेयी की छवि एक कुशल राजनेता, दूरद्रष्टा तथा कालजयी कवि की रही है। उनका व्यक्तित्व विश्वव्यापी एवं सर्वसमावेशी था। राजनीति समाज-जीवन का सबसे कठिन और अहर्निश साधना की मांग करने वाला क्षेत्र है। ऐसी काजल की कोठरी में लगातार ६० साल तक रहने के बाद भी निष्कलंक और वेदाग निकल आना किसी चमत्कार से कम नहीं होता। उनका प्रखर राष्ट्रवाद, संकल्प शक्ति, देशाभिमान, भाषाभिमान, नेतृत्व क्षमता और इन सब श्रेष्ठ गुणों के बाद भी सामान्य बने रहने की क्षमता, यह सब कुछ उनके संघ शाखा प्रशिक्षण एवं स्वयंसेवकत्व के कारण ही संभव हुआ।