हमारा मिशन

इतिहास लेखन के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत

वह बुनियादी ढांचा जो संस्थान के शोध का मार्गदर्शन करता है, ताकि भारत के गौरवशाली अतीत की कथा सत्यनिष्ठ, चरित्र निर्माण करने वाली और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हो।

हमारे कार्य की नींव

"इतिहास" शब्द का अर्थ ही "ऐसा ही निश्चित रूप से हुआ" है। यह सत्य का निष्पक्ष प्रस्तुतीकरण है। अतीत की उपलब्धियाँ हमें ऊर्जा और आत्मविश्वास देती हैं, जबकि भूलें हमें सीख प्रदान करती हैं। इसी उद्देश्य से ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान की स्थापना हुई ताकि १९७ करोड़ वर्षों के मानव इतिहास को सत्य की निष्पक्ष दृष्टि से उजागर किया जा सके।

१९७ करोड़ वर्ष का इतिहास

भारत का इतिहास कुछ हज़ार वर्षों से नहीं, बल्कि सृष्टि के प्रारंभ (हिरण्यगर्भ) से १९७ करोड़ वर्षों तक फैला है। भारत मानवता की जननी है, जहाँ प्रथम मानव सुमेरु पर्वत पर प्रकट हुआ। इसलिए भारत सभी राष्ट्रों, जातियों, धर्मों और विज्ञानों का मूल स्रोत है।

हमारे ब्रह्मांड के सृष्टिकर्ता श्री ब्रह्मा जी १९७ करोड़ २९ लाख ४९ हज़ार ११० वर्ष पूर्व सुमेरु पर्वत पर प्रकट हुए और सृष्टि चक्र का आरंभ किया।

भारतीय इतिहास का ढांचा

भारत का गौरवशाली इतिहास समय की भारतीय वैज्ञानिक गणना प्रणाली के अनुसार चार युगों में विभाजित है:

  • देवयुग (देवताओं का युग): सृष्टि के आरंभ से १०,००० वर्षों तक।
  • ब्रह्मयुग (ब्रह्मा का युग): १९७.२९ करोड़ वर्ष पूर्व से १२.०५ करोड़ वर्ष पूर्व तक।
  • क्षत्रेयुग (योद्धाओं का युग): १२.०५ करोड़ वर्ष पूर्व से ५,११० वर्ष पूर्व तक।
  • कलियुग (वर्तमान युग): पिछले ५,११० वर्ष।

The Mahabharata serves as the dividing line in this long history. History writing must be character-building, culturally enriching, and supportive of Dharma.

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