अक्टूबर 2016

इतिहास दिवाकर
आयतन 6, मुद्दा 3
अक्टूबर
01 अक्ट 2016
आध्यात्मिकता कृषि जीवनी भारतीय इतिहास संस्कृति
अक्टूबर 2016
अक्टूबर 2016 का 'इतिहास दिवाकर' अंक विविध विषयों पर केंद्रित है। इसमें 'ॐ शान्ति का सनातन संस्कार' पर एक संपादकीय, स्वामी श्रीरङ्गनाथनन्द महाराज द्वारा 'आध्यात्मिक जीवन-मानवता का ध्येय' पर एक गहन लेख, और डॉ. बी.सी. चौहान द्वारा प्राचीन भारत के ज्ञान-विज्ञान पर एक अंग्रेजी लेख शामिल है। इसके अतिरिक्त, यह कुल्लू की फसलों, गढ़वाल के सेनापति माधोसिंह भण्डारी के व्यक्तित्व, और ठाकुर रामसिंह जी के साथ व्यक्तिगत अनुभवों और उनके शताब्दी समारोह पर लेख प्रस्तुत करता है।
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मुख्य विशेषताएं

पत्रिका में स्वामी श्रीरङ्गनाथनन्द महाराज का लेख 'आध्यात्मिक जीवन' को मानवता का अंतिम ध्येय बताता है, जो भौतिकता से परे आत्म-ज्ञान और विवेक पर जोर देता है।

डॉ. बी.सी. चौहान का लेख प्राचीन भारत को ज्ञान और सूचना का उद्गम स्थल बताता है, जिसमें तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक और सांस्कृतिक योगदान पर प्रकाश डाला गया है।

कुल्लू घाटी की विविध फसलों पर एक विस्तृत लेख प्रस्तुत किया गया है, जो इस क्षेत्र की अनूठी कृषि पद्धतियों और भौगोलिक विशेषताओं को दर्शाता है।

यशस्वी सेनापति माधोसिंह भण्डारी की वीरगाथा का वर्णन है, जिन्होंने गढ़वाल के लिए न केवल युद्ध में बल्कि नहर निर्माण जैसे विकास कार्यों में भी असाधारण त्याग और पराक्रम दिखाया।

योगदानकर्ताओं

डश
डॉ० शिवाजी सिंह
मार्गदर्शक
चेतराम
मार्गदर्शक
इख
इरविन खन्ना
मार्गदर्शक
डव
डॉ० विद्या चन्द ठाकुर
सम्पादक (Editor)
चग
चेतराम गर्ग
सह सम्पादक (Co-editor) / लेखक (Author)
डर
डॉ० रमेश शर्मा
Editorial Support
डओ
डॉ० ओम प्रकाश शर्मा
Editorial Support
रठ
रवि ठाकुर
Typing and Layout
सश
स्वामी श्रीरङ्गनाथनन्द महाराज
लेखक (Author)
BC
Dr. B.C. Chauhan
लेखक (Author)
Department of Physics & Astronomical Science, Central University of Himachal Pradesh
मर
मौलू राम ठाकुर
लेखक (Author)
डस
डॉ. सुशील कुमार कोटनाला
लेखक (Author)
१५-ए फ्रेण्डस एनकलेव, पो. डिफेंस कॉलोनी, देहरादून (उतराखण्ड)
मज
मोतीलाल जालान
लेखक (Author)
आठ गांव, द्वारा सती प्रैस, गुवाहाटी (असम)

प्रकाशन सारांश

इतिहास दिवाकर - अक्टूबर २०१६

सम्पादकीय

ॐ शान्ति का सनातन संस्कार

ऋषि अनुप्राणित सर्वे भवन्तु सुखिनः सभी सुखी रहें की विश्व कल्याण भावना भारतीय जनमानस के स्वभाव में सहजता से परिव्यापत है। राष्ट्रमानस के इस स्वाभाव में ॐ शान्ति का सनातन संस्कार सन्निहित है। हमारे परम्परागत सभी अनुष्ठान शान्ति पाठ से सम्पन्न होते हैं। यजुर्वेद में उल्लिखित शान्ति पाठ के मन्त्र में सर्वत्र शान्ति के ध्येय की कामना करते हुए कहा गया है –

द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथ्वी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः । वनस्पत्यः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।।

द्युलोक में शान्ति हो, अन्तरिक्ष में शान्ति हो, पृथ्वी लोक में शान्ति हो, जल में शान्ति हो, ओषधियों में शान्ति हो, वनस्पतियों में शान्ति हो, समस्त देवताओं में शान्ति हो, ब्रह्म में शान्ति हो, सब कुछ शान्तिदायक हो, सर्वत्र शान्ति ही शान्ति हो और हमें निरन्तर शान्ति प्राप्त हो।

शान्ति के सनातन संस्कार से सम्पन्न भारतवर्ष में कभी भी शौर्य शक्ति की उपेक्षा नहीं की गई है। जब कभी सुबाहु, ताड़का, मारीच आदि आसुरी सम्पदा वाले लोग शान्ति भंग करने का प्रयास करते हैं तो शान्ति की संस्थापना के लिए शक्ति का प्रयोग करना आवश्यक हो जाता है। आश्विन कृष्ण त्रयोदशी, कलियुगाब्द ५११८ एवं आश्विन प्रविष्टे १३, विक्रमी संवत् २०७३ तदनुसार २८-२९ सितम्बर, २०१६ की रात्रि को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना ने निस्संदेह अदम्य साहसिक और अकल्पनीय कार्यवाही की जिससे भारत सरकार और भारतीय सेना की व्यापक सराहना हुई है। शठे शाठ्यं समाचरेत् अर्थात् दुष्टों से उन्हीं के अनुरूप व्यवहार की नीतिपूर्ण इस कार्यवाही का अत्यधिक ऐतिहासिक महत्त्व है। इस समुचित कार्यवाही में श्रीमद्भगवद्गीता के इस उपदेश का अनुकरण है कि कर्मपथ पर अपने कर्त्तव्य का पालन करते हुए युद्ध करना कोई पाप नहीं है– ततो युद्धाययुज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ।।

राष्ट्रनिष्ठा, विवेकशीलता और तत्परता के साथ किया जाने वाला यह कर्त्तव्य पालन राष्ट्रीय सुरक्षा और शान्ति की संस्थापना का श्रेष्ठ मार्ग है।

ओम शान्ति ! शान्ति ! शान्ति !

संवीक्षण

आध्यात्मिक जीवन- मानवता का ध्येय

स्वामी श्रीरङ्गनाथनन्द महाराज

मानव जाति के इतिहास में कभी मानव अस्तित्व के ध्येय की व्याख्या करने की इतनी तीव्र आवश्यकता नहीं अनुभव की गई जितनी आज की जा रही है। यह केवल बुद्धि विलास का प्रश्न नहीं है, अपितु यह आधुनिक युग के सामान्य एवं असामान्य, प्राच्य एवं पाश्चात्य सभी स्त्री पुरुषों के हृदय में स्वतः उठा हुआ प्रश्न है। अपनी धार्मिक सम्पति के आलोक में इन सहस्रों वर्षों से मानवता आध्यात्मिकता को मानव जीवन का ध्येय मानती आई है, किन्तु पाश्चात्य यूरोपीय जातियों द्वारा वर्तित बौद्धिक एवं सामाजिक क्रान्ति के कारण पिछली शताब्दियों में उस धार्मिक सम्पति का बल शिथिल पड़ गया है। इसीलिए उस क्रान्ति के स्वरूप की समीक्षा करने तथा उसके प्रकाश में मानव अस्तित्व के ध्येय को फिर से घोषित किए जाने की आवश्यकता है। आधुनिक विज्ञान की समीक्षात्मक एवं प्रयोगात्मक विधियों के कारण पश्चिमी यूरोप में सत्रहवीं शताब्दी में जो शक्तिपूर्ण यन्त्र कौशलीय सभ्यता उत्पन्न हुई, उसके तीव्र आघात को समस्त संसार में मानवता ने अनुभव किया।...

कृषि दर्शन

कुल्लू की फसलें

मौलू राम ठाकुर

जिस प्रकार हिमाचल प्रदेश के ज़िला कुल्लू का इलाका भौगोलिक स्थिति में देश के अन्य भागों में अलग-थलग है, उसी प्रकार कृषि उत्पादन की दृष्टि से भी यहां कुछ भिन्नता है। देश के अन्य भागों की तरह कुल्लू भी कृषि प्रधान इलाका है। बल्कि यूं कहना चाहिए कि कुल्लू पूर्णतया कृषि पर आश्रित है। हां, इतना अवश्य कहा जा सकता है कि यहां नकदी फसलें इतनी अधिक उगती हैं जितनी अन्य फसलें। कुल्लू को विभिन्न प्राकृतिक उपहारों का सौभाग्य प्राप्त है। जहां एक ओर गेहूं की सराहनीय पैदावार होती है, वहीं दूसरी ओर आलू, लहसुन जैसी फसलें तथा सेब आदि फल की उपज भी खूब होती है।...

व्यक्तित्त्व

गढ़वाल के यशस्वी सेनापति माधोसिंह भण्डारी

डॉ. सुशील कुमार कोटनाला

माधोसिंह भण्डारी गढ़वाल राज्य के ४६वें परमारवंशीय राजा महिपत शाह (१६२६-१६४६ शासनकाल) के तीन प्रमुख सेनापतियों- रिखोल लोदी, बनवारी दास तथा माधो सिंह में से एक थे। गढ़वाल में माधोसिंह भण्डारी लब्ध प्रतिष्ठित महायोद्धा हैं। मलेथा की समतल किन्तु बंजर भूमि को सिंचित कृषि भूमि में बदलने का श्रेय माधोसिंह भण्डारी को ही जाता है। मलेथा के खेतों में केवल मोटे अनाज का ही उत्पादन किया जाता था। इस बात की शिकायत उनकी पत्नी उदीना ने उनसे की। इस पर वीर माधोसिंह भण्डरी ने मलेथा गांव की जनता के सहयोग से भूमि के उतर दिशा में बह रही चन्द्रभागा नदी से मलेथा की समधरातल भूमि तक एक नहर बनाई।...

ध्येय पथ

ठाकुर रामसिंह शताब्दी समारोह

चेतराम गर्ग

ठाकुर रामसिंह शताब्दी समारोह के अन्तर्गत कलियुगाब्द ५११८ विक्रमी संवत् २०७३, श्रावण कृष्ण १२-१३ (३१ जुलाई, २०१६) सांय ५ बजे, रोहिणी सैक्टर १८, अग्रसेन टेक्निकल इन्स्टिच्यूट के सभागार में भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह माननीय कृष्ण गोपाल जी थे। असम से लोक सभा सांसद रमण डेका जी इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अग्रेसन इन्स्टिच्यूट के निदेशक डॉ. नन्द किशोर जी ने की।...