विरासत को नमन: नेरी (हमीरपुर) में ठाकुर रामसिंह जी की 111वीं जयंती का भव्य आयोजन
हमीरपुर (नेरी) — भारतीय ज्ञान परंपरा और इतिहास संकलन के पुरोधा, माननीय ठाकुर रामसिंह जी की 111वीं जयंती के उपलक्ष्य में 15 फरवरी, 2026 (रविवार) को ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान, नेरी में एक विशाल समारोह आयोजित किया जा रहा है। यह समारोह उस महान व्यक्तित्व के जीवन का उत्सव है जिनके अथक प्रयासों ने भारतीय इतिहास के दृष्टिकोण को उसकी जड़ों की ओर वापस मोड़ने का कार्य किया।
राष्ट्रीय जागरण के लिए समर्पित जीवन
1915 में हमीरपुर जिले के झण्डवीं गांव में जन्मे ठाकुर रामसिंह जी एक प्रखर शिक्षाविद थे, जिन्होंने लाहौर से इतिहास में एम.ए. की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक करियर के बजाय सेवा मार्ग को चुनते हुए, वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक समर्पित प्रचारक बने। उनका सबसे बड़ा योगदान 'अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना' की स्थापना रहा, जिसके माध्यम से उन्होंने देश भर के विद्वानों को जोड़कर राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से इतिहास लेखन का मार्ग प्रशस्त किया।
कार्यक्रम का विवरण और मुख्य आकर्षण
जयंती समारोह को आध्यात्मिक श्रद्धा और शैक्षणिक विमर्श के संगम के रूप में मनाया जाएगा:
- आध्यात्मिक शुरुआत: दिन का शुभारंभ प्रातः 8:00 बजे हवन यज्ञ के साथ होगा, जिसके पश्चात 10:30 बजे तक भक्तिपूर्ण भजन-कीर्तन की प्रस्तुतियां होंगी।
- प्रेरणा पुंज: प्रतिमा अनावरण: कार्यक्रम का एक ऐतिहासिक क्षण प्रातः 10:45 बजे ठाकुर रामसिंह जी की भव्य प्रतिमा का अनावरण होगा, जो उनके मार्गदर्शन के प्रति एक स्थायी श्रद्धांजलि के रूप में स्थापित की गई है।
- साहित्यिक मील के पत्थर: इस अवसर पर संस्थान द्वारा कई महत्वपूर्ण शोध ग्रंथों का लोकार्पण किया जाएगा, जिनमें 'हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत' और ऋग्वेद में वर्णित 'पश्चिमी हिमालय के वैदिक संदर्भ' प्रमुख हैं।
- सार्वजनिक सभा: प्रातः 11:00 बजे से एक औपचारिक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रबुद्ध अतिथि और विद्वान ठाकुर रामसिंह जी की शोध पद्धति और उसके प्रभाव पर चर्चा करेंगे।
- सामूहिक भोज एवं फलाहार: समावेशी परंपरा के अनुरूप, दोपहर 1:45 बजे सामूहिक प्रीति भोज का आयोजन होगा। शिवरात्रि के उपलक्ष्य में व्रत रखने वालों के लिए विशेष फलाहार की व्यवस्था की गई है।
भविष्य का संकल्प
ठाकुर रामसिंह जी का यह दृढ़ विश्वास था कि इतिहास, कला और संस्कृति किसी भी राष्ट्र की सामूहिक चेतना के आधारस्तंभ होते हैं। आज, संस्थान उनके इसी मिशन को 'हिमाचल प्रदेश का बृहद इतिहास' (छह खंडों में) और हिमालय की सामाजिक संरचनाओं पर शोध जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स के माध्यम से आगे बढ़ा रहा है।
संस्थान के अध्यक्ष प्रो. भाग चन्द चौहान और महासचिव भूमिदत्त शर्मा ने इतिहास और विरासत के इस गौरवशाली उत्सव में सभी को सपरिवार सम्मिलित होने का सादर निमंत्रण दिया है।
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