ठाकुर रामसिंह 111वीं जयन्ती समारोह

15 फ़र 2026 • 08:00
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प्रतिमा अनावरण हवन यज्ञ एवं भजन-कीर्तन प्रदर्शनी अवलोकन ठाकुर रामसिंह जयंती शिवरात्रि
ठाकुर रामसिंह 111वीं जयन्ती समारोह
ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान, नेरी (हमीरपुर) द्वारा संस्थान के संस्थापक और भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शक माननीय ठाकुर रामसिंह जी की 111वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक भव्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है. यह कार्यक्रम 15 फरवरी, 2026 (रविवार) को आयोजित होगा, जिसमें हवन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रतिमा अनावरण और शोध प्रकाशनों का लोकार्पण किया जाएगा.
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मुख्य विशेषताएं

आध्यात्मिक शुरुआत: दिन का प्रारंभ 'हवन यज्ञ' (प्रातः 8:00 – 9:00 बजे) और उसके पश्चात 'भजन-कीर्तन' से होगा ।

प्रतिमा अनावरण: कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रातः 10:45 बजे ठाकुर रामसिंह जी की प्रतिमा का अनावरण है ।

.प्रदर्शनी: आगंतुकों के लिए संस्थान के शोध कार्यों पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा ।

लोकार्पण (पुस्तकों का विमोचन): जयंती समारोह के अवसर पर महत्वपूर्ण शोध ग्रंथों का विमोचन किया जाएगा,

परियोजनाओं की जानकारी: संस्थान की वर्तमान गतिविधियों जैसे 'हिमाचल प्रदेश का बृहद इतिहास' और उत्तर-पूर्वी भारत की जनजातियों पर शोध की झलक ।

सार्वजनिक कार्यक्रम: विद्वानों और अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक सामूहिक सत्र ।

भोज एवं फलाहार: कार्यक्रम के समापन पर दोपहर 1:45 बजे से सभी के लिए भोजन और शिवरात्रि व्रत फलाहार की व्यवस्था ।

विवरण

एक महान इतिहासकार की विरासत का स्मरण: श्रद्धेय ठाकुर रामसिंह जी की 111वीं जयंती

ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान, नेरी (हमीरपुर) आप सभी को संस्थान के संस्थापक एवं मार्गदर्शक श्रद्धेय ठाकुर रामसिंह जी के 111वें जयन्ती समारोह एवं इतिहास दिवस के पावन अवसर पर सपरिवार सादर आमंत्रित करता है। यह भव्य आयोजन रविवार, 15 फरवरी, 2026 को संस्थान परिसर में आयोजित किया जाएगा।

ठाकुर रामसिंह जी: जीवन और साधना

16 फरवरी, 1915 को हमीरपुर के झण्डवीं गांव में एक किसान परिवार में जन्मे ठाकुर रामसिंह जी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में पूर्ण करने के पश्चात वे उच्च शिक्षा हेतु लाहौर गए, जहाँ उन्होंने 1942 में इतिहास विषय में एम.ए. की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनकी शैक्षणिक योग्यता को देखते हुए उन्हें उसी महाविद्यालय में आचार्य (प्रोफेसर) के पद का प्रस्ताव मिला, किंतु राष्ट्र सेवा के संकल्प के कारण उन्होंने इस पद को त्यागकर स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में अपना जीवन समाज को समर्पित कर दिया।

1988 में उन्हें 'अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना' का दायित्व सौंपा गया। उन्होंने अनवरत परिश्रम कर देश के प्रत्येक जिले में विद्वानों को जोड़ा और भारतीय इतिहास दृष्टि का पुनर्जागरण किया। वे 1992 से 2000 तक इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। उनका दृढ़ विश्वास था कि "इतिहास, कला और संस्कृति किसी भी राष्ट्र की सामूहिक चेतना के आधारस्तंभ होते हैं।"

संस्थान की स्थापना और उद्देश्य

माननीय ठाकुर रामसिंह जी के मार्गदर्शन में 7 अक्तूबर, 2002 (आश्विन नवरात्र) को नेरी गांव में इस शोध संस्थान की स्थापना हुई। संस्थान का मूल उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक शोध और सामाजिक जागरण के माध्यम से इतिहास का संशोधन करना है।

कार्यक्रम विवरण (15 फरवरी, 2026)

  • प्रातः 08:00 – 09:00 बजे: पावन हवन यज्ञ
  • प्रातः 09:00 – 10:30 बजे: सांस्कृतिक कार्यक्रम (भजन-कीर्तन)।
  • प्रातः 10:30 – 10:45 बजे: शोध एवं इतिहास प्रदर्शनी अवलोकन
  • प्रातः 10:45 – 11:00 बजे: ठाकुर रामसिंह जी की भव्य प्रतिमा का अनावरण
  • प्रातः 11:00 – दोपहर 01:30 बजे: सार्वजनिक कार्यक्रम एवं विद्वत उद्बोधन।
  • दोपहर 01:45 बजे से: सामूहिक भोज एवं शिवरात्रि व्रत फलाहार।

अतिथि एवं वक्तागण

  • मुख्य अतिथि: श्रीमान जगत प्रकाश नड्डा (केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं जन कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री, भारत सरकार)
  • अध्यक्ष: प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना)
  • मुख्य वक्ता: श्रीमान सुरेश सोनी (राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ)
  • विशिष्ट अतिथि: पूज्य महन्त सूर्यनाथ (सप्तदेवी मन्दिर, किन्नू) एवं प्रो. प्रेम कुमार धूमल (पूर्व मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश)

नवीन लोकार्पण (पुस्तकों का विमोचन)

समारोह के दौरान संस्थान की निम्नलिखित महत्वपूर्ण शोध कृतियों का लोकार्पण किया जाएगा:

  1. हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत
  2. हिमाचल प्रदेश के चयनित गांवों का इतिहास
  3. ऋग्वेद में वर्णित पश्चिमी हिमालय से सम्बन्धित वैदिक संदर्भ
  4. राजस्थान के वागड़ क्षेत्र का सामाजिक एवं सांस्कृतिक इतिहास
  5. उत्तर-पूर्वी भारत की जनजातियों का आवास, समाज एवं अर्थव्यवस्था
  6. चरवाहे, वन और औपनिवेशिक शासन: हिमाचल के गुज्जरों का अध्ययन

स्थान: ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान, गांव व डाकघर नेरी, जिला हमीरपुर (हि.प्र.) संपर्क: 01972-262905 | 94181-03488